प्रदर्ष मंजूषा – 1 और 2

प्रदर्ष मंजूषा – 1 और 2 : इन दोनों प्रदर्ष मंजूषा में मानव मृण्मूर्तियों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्ष मंजूषा 1 में 27 एवं प्रदर्ष मंजूषा 2 में 21 पुरावशेषों को प्रदर्शित किया है जिसमें मानव मृण्मूर्तियों के सिर, बुद्ध की मूर्ति, हिन्दु देवी दुर्गा एवं नाग की मूर्तियाँ आदि प्रमुख है। इन सभी पुरावशेषों का काल तीसरी सदी ई0 पूर्व से साँतवीं -आठवीं शताब्दी ई0 तक माना गया है।

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प्रदर्ष मंजूषा – 3 और 4

प्रदर्ष मंजूषा – 3और 4 :   प्रदर्ष मंजूषा 3 और 4 में पशु मृणमूर्तियों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्ष मंजूषा 3 में 21 तथा प्रदर्ष मंजूषा 4 में 21 मूर्तियों को प्रदर्शित किया गया है जिसमें घोड़े, नाग, पक्षी, बन्दर, भेड़, हाथी, कुत्ता, गेंडा एवं कई पुरावशेषों को एकत्रित कर निर्मित बैलगाड़ी आदि प्रमुख है जिनका काल तीसरी शताब्दी ई0 पूर्व से चैथी शताब्दी ई0 तक माना गया है।

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प्रदर्ष मंजूषा 5

प्रदर्ष मंजूषा 5 :  इस प्रदर्ष मंजूषा में पकी मिट्टी के बने थप्पा, साँचा, चक्का, गेंद, टोंटी, मनके चमकाने के साँचे आदि को प्रदर्शित किया गया है जिनका काल दूसरी शताब्दी ई0 पूर्व से चैथी शताब्दी ई0 तक माना गया है।

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प्रदर्ष मंजूषा 6

प्रदर्ष मंजूषा 6 :   इस प्रदर्ष मंजूषा में पकी मिट्टी एवं अर्द्ध कीमती रों के मनके तथा कर्ण आभूषण प्रदर्शित है जिनका काल चैथी से छठी शताब्दी ई0 है।

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प्रदर्ष मंजूषा 7,8 और 9

प्रदर्ष मंजूषा 7,8 और 9 :   इन तीनों प्रदर्ष मंजूषाओं में लघु एवं बड़े मृदभांड, घंटी, लैम्प आदि को प्रदर्शित किया गया है। इनका काल दूसरी शताब्दी से छठी शताब्दी तक आँकी गई है।

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प्रदर्ष मंजूषा 10

प्रदर्ष मंजूषा 10 :   इस प्रदर्ष मंजूषा में उत्तरी  कृष्ण मार्जित मृदभांड के टुकड़ों को प्रदर्शित किया गया है। इसमें सुनहरे रंग का छठच् प्रमुख है।

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